आधी रात का खौफ New horror story

गर्मियों का महीना था और मई की स्कूल की छुट्टियाँ पड़ने वाली थीं। एलेक उस समय पाँचवीं कक्षा का एक साधारण सा बच्चा था, जिसकी ज़िंदगी स्कूल से घर और घर से स्कूल तक ही सीमित थी। अगर समय मिलता, तो वह पार्क में अकेला खेल लिया करता था। उस दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ। सुबह से शाम तक की भागदौड़, फिर ढेर सारा होमवर्क और रात को देर तक जागकर एलेक गणित के सवाल हल कर रहा था। रात के करीब 10:30 बज रहे थे, एलेक ने अपना होमवर्क खत्म किया और अकेले खाना खाने बैठ गया। घर के बाकी सदस्य अपने बिस्तरों पर जाकर सो चुके थे।

एलेक भी दिन भर की थकान के कारण इतना चूर था कि बिस्तर पर लेटते ही उसकी आँखें मूँद गईं। पर उसे क्या पता था कि सुकून की यह नींद कुछ ही घंटों में एक भयानक सपने में बदलने वाली है। अचानक एलेक की नींद खुली और वह बिस्तर पर उठकर बैठ गया। अंधेरे में अपनी आँखें मलते हुए उसने दीवार पर लगी घड़ी की ओर देखा। रात का 1:00 बज रहा था। पूरे घर में पहली बार ऐसी खामोशी थी जो एलेक ने पहले कभी महसूस नहीं की थी। वह सन्नाटा इतना गहरा था कि एलेक को घड़ी की ‘टिक-टिक’ से भी डर लग रहा था—उसे लग रहा था जैसे वह घड़ी की आवाज़ नहीं,

बल्कि किसी के कमरे में चलने की आहट हो। कमरे में घना अंधेरा था और खिड़की से आने वाली हल्की रोशनी भी अब बंद हो चुकी थी। माता-पिता और भाई-बहन पास ही गहरी नींद में सो रहे थे, पर फिर भी एलेक को ऐसा लग रहा था जैसे वह उस कमरे में बिल्कुल अकेला है।एलेक चुपचाप लेट गया और छत की तरफ देखने लगा, तभी अचानक उसके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने महसूस किया कि उसके सिरहाने से कोई चीज़ बहुत तेज़ी से गुज़री है। वह न तो हवा का झोंका था और न ही कोई रोशनी। उस चीज़ के गुज़रने से एलेक को एक भारीपन महसूस हुआ और फिर अचानक ‘धप’ की आवाज़ आई—

जैसे कोई भारी चीज़ फर्श पर आकर खड़ी हो गई हो। यह महसूस होते ही एलेक के रोंगटे खड़े हो गए। डर के मारे वह देख तो नहीं पाया कि वह क्या था, पर उसकी एक हल्की चीख निकल गई। उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि उसे लगा शायद घर वाले जाग गए होंगे, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। एलेक ने बिना कुछ सोचे-समझे तुरंत चादर ओढ़ी और अपना मुँह पूरी तरह ढक लिया।मई का महीना, भीषण गर्मी और ऊपर से वह मोटी चादर! कुछ ही देर में एलेक पसीने से तर-बतर हो गया। चादर के अंदर साँस लेना भी मुश्किल हो रहा था, लेकिन डर इतना था कि चादर हटाने की हिम्मत नहीं हुई।

एलेक पसीने में भीग ही रहा था कि उसे एक और आवाज़ सुनाई दी। जैसे वह ‘चीज़’ अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हो। घर के आगे वाले हिस्से में एक छोटा सा मंदिर था। एलेक को साफ सुनाई दिया कि कोई मंदिर की तरफ जा रहा है। फिर एक ऐसी आवाज़ आई जिसे सुनकर एलेक चादर के अंदर काँप गया—‘टच-टच’। वह आवाज़ ऐसी थी जैसे कोई मंदिर के पास माचिस जलाने की कोशिश कर रहा हो। एलेक को यह आवाज़ बिल्कुल साफ सुनाई दे रही थी। उसने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और मन ही मन प्रार्थना करने लगा। उसके मुँह से बस एक ही शब्द निकल रहा था, “भगवान बचा लो, कृपया भगवान मुझे बचा लो।”

वह काफी देर तक उसी हालत में रहा। कुछ समय बाद जब बिजली आई, तो पूरे कमरे में रोशनी फैल गई। उसने हिम्मत जुटाकर चेहरे से चादर हटाई और चारों तरफ देखा, पर वहाँ कोई नहीं था। सब कुछ सामान्य था। माता-पिता अपनी जगह सो रहे थे और दरवाज़े बंद थे। उसने घड़ी देखी, सुबह के 4:00 बजने वाले थे। एलेक बिस्तर पर बैठ गया और सोचने लगा कि कैसे उसने वे तीन घंटे उस चादर के भीतर बिताए।उसका गला पूरी तरह सूख चुका था। वह डरते-डरते रसोई में पानी पीने गया। घबराहट के कारण उसके हाथ काँप रहे थे और जैसे ही उसने गिलास उठाया, वह हाथ से छूटकर फर्श पर गिर गया—‘छनन्नन्!’

उस आवाज़ से माता-पिता की आँख खुल गई। वे घबराकर बाहर आए। उन्हें देखकर एलेक रोने लगा और उसने रोते-रोते पूरी बात बताई। पिता ने घर का हर कोना जाँचा, पर कुछ नहीं मिला।उस दिन के बाद भी कई बार रात को बिजली गई, गर्मी हुई और सन्नाटा भी रहा… लेकिन वह ‘माचिस जलने की आवाज़’ और वह ‘सिरहाने से कूदने का अहसास’ फिर कभी महसूस नहीं हुआ। आज भी जब मैं उस रात के बारे में सोचता हूँ, तो समझ नहीं पाता कि वह मेरा वहम था, या फिर उस रात मेरे कमरे में वास्तव में कोई और भी था।
Conclusion
एलेक की वह रात डर और सस्पेंस का एक ऐसा मिश्रण थी जिसने उसे जीवन भर के लिए एक अनसुलझा सवाल दे दिया। हालाँकि रोशनी होने पर कमरे में कोई नहीं मिला, लेकिन वे तीन घंटे का सन्नाटा, माचिस जलने की रहस्यमयी आवाज़ और सिरहाने से किसी के गुज़रने का भारीपनमहज़ कल्पना नहीं लग रहे थे।
यह कहानी हमें अहसास कराती है कि कभी-कभी सन्नाटा और अंधेरा हमारे दिमाग के साथ खेल खेलते हैं, या फिर शायद हमारी समझ से परे भी कुछ ऐसी चीज़ें होती हैं जो सिर्फ तभी सामने आती हैं जब दुनिया सो रही होती है। वह रात बीत गई, पर उसका खौफ एलेक के मन में हमेशा के लिए घर कर गया।
