New Scary Stories Stories एक शापित हवेली का ग्रास New Scary Stories Series 43

एक शापित हवेली का ग्रास New Scary Stories Series 43

एक शापित हवेली का ग्रास New Scary Stories Series 43 post thumbnail image

एक शापित हवेली का ग्रास

आर्यन खन्ना (नाम का संयोग मात्र) एक लेखक । उसे अपनी नई किताब ‘द साइलेंट वॉल्स’ को खत्म करने के लिए एक ऐसी जगह चाहिए थी जहाँ कोई शोर न हो। तो  उसे पुरानी दिल्ली के बाहरी इलाके में एक  विशाल, वीरान हवेली बेहद सस्ते दाम पर मिली, तो उसे लगा कि उसकी किस्मत खुल इतनी सस्ती हवेली ले कर

हवेली सफेद रंग की थी, लेकिन वक्त की मार और नमी ने उसे मटमैला और पीला कर दिया था। उसमे भारी लकड़ी के दरवाजे, ऊंची छतें और सबसे अजीब बात—हवेली की  दीवारें। और हवेली के दीवारों से कहीं ज्यादा मोटी थीं, लगभग तीन फीट। मकान मालिक, एक बूढ़ा और रहस्यमयी व्यक्ति जिसका नाम ‘मिस्टर डिसूजा’ था, डिसूजा ने आर्यन को चाबियाँ देते वक्त सिर्फ एक

बात कही थी, बेटा, रात को अगर दीवारों से संगीत सुनाई दे, तो उसे अनसुना कर देना। पुरानी यादें अक्सर गूँजती हैं।आर्यन ने इसे एक बूढ़े आदमी की सनक समझकर हँसकर टाल दिया। उसने हवेली के सबसे ऊपरी मंजिल के कमरे में रहने का मन बनाया। वह कमरा चारों तरफ से भारी दीवारों से घिरा था, जिसमें केवल एक छोटी सी खिड़की थी जो पीछे के घने जंगल  की ओर खुलती थी।

पहली तीन रातें तो सब कुछ नार्मल रहा । आर्यन ने लगभग तीन दिन मैं तीन अध्याय लिख लिए थे। लेकिन चौथी रात, जब घड़ी मैं  रात के 1:30बजाए, तो उस दिन आर्यन के कमरे मैं सन्नाटा कुछ जादा ही हो गया था । आर्यन अपने लैपटॉप पर टाइप ही कर रहा था कि अचानक उसे एक आवाज सुनाई दी।“टिक… टिक… खुरच…”यह आवाज छत से नहीं, बल्कि ठीक उसके पीछे वाली दीवार के अंदर से आ रही थी।

पहली तीन रातें तो सब कुछ नार्मल रहा । आर्यन ने लगभग तीन दिन मैं तीन अध्याय लिख लिए थे। लेकिन चौथी रात, जब घड़ी मैं  रात के 1:30बजाए, तो उस दिन आर्यन के कमरे मैं सन्नाटा कुछ जादा ही हो गया था । आर्यन अपने लैपटॉप पर टाइप ही कर रहा था कि अचानक उसे एक आवाज सुनाई दी।“टिक… टिक… खुरच…”यह आवाज छत से नहीं, बल्कि ठीक उसके पीछे वाली दीवार के अंदर से आ रही थी।
उसे लगा शायद कोई बड़ा चूहा या नेवला ईंटों के बीच फंस गया होगा। आर्यन कुर्सी से उठा   और दीवार को गौर से देखने लगा । दीवार पर लगा पुराना वॉलपेपर कहीं-कहीं से उखड़ा हुआ था। जैसे ही उसने दीवार पर हाथ रखा, उसे एक अजीब सी  कंपन महसूस हुई । जैसे की उस दीवार मैं कुछ गर्माहट है उसने आवाज सुनने के लिया कान दीवार से लगाया । तो सुनते ही  उसके रोंगटे खड़े हो गए  अंदर चूहे नहीं थे। बल्कि अंदर से सांस लेने की आवाज आ रही थी।— ‘हूँ… श्शश… हूँ… श्शश…’। जैसे कोई अंदर फ़सा हुआ हो आर्यन झटके से पीछे हो गया ।

 

उसने सोचा कि शायद यह उसका वहम है। क्युकी वसे वी वह लेखक था, उसकी कल्पना और शक्ति वैसे भी  बहुत तेज थी। उसने खुद को समझाने की कोशिश की कि पुरानी इमारतों में हवा के दबाव से ऐसी आवाजें आती हैं।अगले दिन  आर्यन ने पास के एक पुराने पुस्तकालय में जाकर उस हवेली के बारे में छानबीन की। वहां उसे जो चीज पता चली , उसने उसकी रातों की नींद उड़ा दी। 1920 के दशक में, यह हवेली एक सनकी तांत्रिक जमींदार की थी।

कहा जाता था कि उसने अपनी अमरता के लिए एक ‘जीवित समाधि’ का निर्माण करवाया था। उसने अपनी पत्नी और बच्चों को जिंदा दीवारों के बीच चुनवा दिया था, इस विश्वास के साथ कि उनकी आत्माएं घर की रक्षा करेंगी और उसे कभी मरने नहीं देंगी।रिकॉर्ड्स के अनुसार, उस जमींदार की मौत भी रहस्यमयी थी। वह अपने ही कमरे में मृत पाया गया था, लेकिन उसके शरीर पर एक भी जख्म नहीं था। लोगों का मानना था कि दीवारें उसे निगल गई थीं।

आर्यन शाम को वापस हवेली आया, उसका मन घबरा रहा था। उसने सोचा कि वह आज ही यह जगह छोड़ देगा। लेकिन जैसे ही वह कमरे में अपना सामान पैक करने पहुँचा, उसके कमरे का दरवाजा अपने आप बंद हो गया। उसने उसे खोलने की पूरी ताकत लगा दी, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ। बिजली अचानक चली गई । अब पूरे कमरे मैं कवेल आर्यन की टोर्च की ही रोशनी थी

रात के तीन बजते ही हवेली सब कुछ अजीब अजीब सा लगने लग । दीवारों के अंदर से अब सिर्फ सांसें नहीं, बल्कि चीखें आने लगी थीं। ऐसा लग रहा था जैसे सैकड़ों लोग दीवारों के दूसरी तरफ से बाहर निकलने के लिए तड़प रहे हों।आर्यन ने टॉर्च की रोशनी दीवार पर डाली। उसने देखा कि दीवार का वॉलपेपर धीरे-धीरे गल रहा था। आर्यन ने देखा एक काला, गाढ़ा कुछ गीला गिल्स  दीवारों से रिसने लगा था। वह खून नहीं था, बल्कि किसी पुराने ज़माने के तारकोल जैसा था और बहुत ही गंदा सा

अचानक, दीवार के बीचों-बीच एक दरार पड़ने लगी । आर्यन ने हिम्मत जुटाकर उस दरार में अपनी टॉर्च मारी। अंदर का नजारा किसी नरक से कम नहीं था। दीवारों के बीच का खोखला हिस्सा इंसान की हड्डियों और बालों से भरा हुआ था। उसे वहां एक एक सूखा हुआ चेहरा दिखा—, ममी जैसा चेहरा जिसकी खाल हड्डियों से चिपकी हुई थी। वह चेहरा अचानक हिला और उसकी आँखें खुल गई । वे आँखें सफेद थीं, जिनमें कोई पुतली नहीं थी।

वह आकृति चिल्लाई—वो भी एक डैम शैतानी आवाज। मैं । दीवार की दरार खुलने लगी  और वह आकृति धीरे-धीरे बाहर लगी। आर्यन डरके पीछे हटने लगा , लेकिन जिस दीवार से वह टकराया, उसने उसे ररोक दिया  लिया।आर्यन ने महसूस किया कि पीछे वाली दीवार अब ठोस पत्थर की दीवार जैसी नहीं लग रही थी । वह चिपचिपी हो गई थी। दीवार से दो हाथ बाहर निकले और आर्यन को जकड़ लिया। वे हाथ ठंडे और सड़े हुए थे। आर्यन बोला

“नहीं! मुझे छोड़ दो!” आर्यन पागलों की तरह चिल्लाया। और उन हाथो की जकड़ से बाहर निकल गया  जिसे ही वो उन हाथो से बाहर निकला दीवार से दर्द भरी चीखें निकलने लगीं, जैसे वह हवेली एक  जीवित हवेली हो।तभी कमरे के कोने में रखे पुराने आईने में उसने अपनी परछाई देखी। उसकी अपनी परछाई उससे अलग हरकत कर रही थी। आईने के अंदर का आर्यन रो रहा था और मदद के लिए हाथ आगे बड़ा रहा था , जबकि असली आर्यन दीवार के अंदर खिंचता जा रहा था।

दीवारों के भीतर से एक भारी आवाज गूँजी: हमे नए खून की जरूरत हैहमें एक और लेखक चाहिए जो हमारी दास्तान को अंदर बैठकरलिखे…”आर्यन का आधा शरीर दीवार के अंदर जा चुका था। उसे महसूस हो रहा था कि ईंटें उसकी हड्डियों को कुचल रही हैं और सीमेंट उसके फेफड़ों में भर रहा है। उसने आखिरी बार अपने फोन की ओर देखा। फोन की स्क्रीन पर रिकॉर्डिंग ऑन थी।

उसने आखिरी शब्द कहे, अगर कोई यह सुन रहा हैतो इस हवेली को जला दो! दीवारेंदीवारें जिंदा हैं!”जैसे ही घड़ी की सुइयां 4:00 पर पहुँचीं, एक ज़ोरदार धमाका हुआ और सन्नाटा छा गया। कमरे की लाइटें जल उठीं। दीवारें फिर से ठोस हो गईं। सीमेंट सूख गया। वॉलपेपर अपनी जगह पर वापस आ गया। कमरे में कोई दरार नहीं थी,बस मेज पर आर्यन का लैपटॉप पड़ा था, जिस पर ‘द साइलेंट वॉल्स’ का आखिरी पन्ना अपने आप टाइप हो रहा था।

(Conclusion)

‘द साइलेंट वॉल्स’ की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी सन्नाटा, शोर से कहीं ज्यादा खतरनाक होता है। आर्यन खन्ना शांति की तलाश में उस हवेली में गया था, लेकिन वह खुद उस खौफनाक शांति का हिस्सा बन गया।

वह हवेली केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं थी, बल्कि एक ‘जीवित कब्र’ थी जो लेखकों की कल्पना और उनके शरीर को निगलकर अपनी दीवारों को मजबूत करती थी। अंत में, आर्यन की किताब तो पूरी हो गई, लेकिन उसे पढ़ने वाला कोई नहीं बचा, क्योंकि वह खुद उन दीवारों की ‘पुरानी यादों’ में दफन हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

दीवारों के बीच: एक शापित हवेली का ग्रास New Scary Stories Series 41

दीवारों के बीच: एक शापित हवेली का ग्रास New Scary Stories Series 42दीवारों के बीच: एक शापित हवेली का ग्रास New Scary Stories Series 42

दीवारों के बीच: एक शापित हवेली का ग्रास आर्यन खन्ना (नाम का संयोग मात्र) एक लेखक । उसे अपनी नई किताब ‘द साइलेंट वॉल्स’ को खत्म करने के लिए एक

Amavas Ki Raat | अमावस की रात

Amavas Ki Raat | अमावस की रात ।New Scary Stories Series 7Amavas Ki Raat | अमावस की रात ।New Scary Stories Series 7

Amavas Ki Raat | अमावस की रात लगभग आंधी रात हो चुकी थी और बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। अपना काम खत्म करके मैं ऑफिस से निकलने

होली पर जगा मंदिर का शव Horror stories

होली पर जगा मंदिर का शव Horror stories New Scary Stories S28होली पर जगा मंदिर का शव Horror stories New Scary Stories S28

होली पर जगा मंदिर का शव Horror stories होली का दिन आ गया था और सारे लोग होली के त्योहार में व्यस्त हो रखे थे। बच्चे अलग-अलग रंग के गुब्बारों