मुर्दाघर का साया Horror Story

रात के क़रीब दो बजे की बात है जब जीवन अस्पताल पूरी तरह से सुनसान हो चुका था। सिर्फ़ नीचे वाले मूर्दाघर (मॉर्ग) में ट्यूबलाइट टिमटिमा रही थी। बस वहाँ पे हर्ष नाम का एक इंटर्न डॉक्टर, अकेले अपनी ड्यूटी कर रहा था। उसका काम था जो नई बॉडी आती है उनका रिकॉर्ड बनाना। हर्ष रिकॉर्ड लिखने के लिए मूर्दाघर के कमरे में घुसा तो उसको वहाँ पे सड़ी हुई लाशों की बदबू आ रही थी। मूर्दाघर के अंदर चार नए स्ट्रेचर रखे थे, उसके ऊपर सफ़ेद चादर डाली हुई थी।

और वहाँ बस दीवार पे लगी हुई घड़ी की टिक-टिक की ही आवाज थी। हर्ष ने फाइल खोली तो उसमें लिखा था बॉडी नं. 46, महिला, उम्र तीस साल, मौत की वजह रोड एक्सीडेंट। उसने उस महिला के ऊपर से चादर हटाई तो चेहरा एकदम शांत था, पर उस औरत को देख के ऐसा लग रहा था कि जैसे उसमे अब भी कुछ साँसें हों। उसने जैसे ही और ध्यान से देखा तो उसे चादर के नीचे से कुछ हिलता हुआ दिखा। उसने झटके से पीछे हाथ हटा लिया तभी सब नार्मल हो गया। उसे लगा शायद बस हवा के मारे ही हुआ होगा।

पर अपने मन की तसल्ली के लिए उसने स्टेथोस्कोप लगाके चेक किया तो उसे हल्की-हल्की साँसों की आवाज सुनाई दी। हर्ष का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। ‘यह कैसे हो सकता है?’ उसने जल्दी से फ़ोन कर के अपने सीनियर डॉक्टर को बुलाया। पर जब तक सीनियर डॉक्टर आए, शरीर ठंडा पड़ चुका था। सीनियर डॉक्टर ने हर्ष से हँसते हुए कहा, “लगता है तुम ज़्यादा थक चुके हो,” बस इतना बोला और चला गया। मूर्दाघरकी ट्यूबलाइट अभी भी टिमटिमा रही थी। हर्ष ने फिर फाइल उठाई और उसमे लिखा कि हल्की-हल्की साँस चलती हुई महसूस हुई पर सच मेंऐसा था नहीं।

हर्ष सब कुछ फाइल में लिख ही रहा था कि तभी उसके पीछे से धीरे-धीरे कुछ सरकने की आवाज आई। उसने मुड़ के देखा तो स्ट्रेचर अब टेढ़ा हो गया था और वो सफ़ेद चादर नीचे पड़ी थी। वो स्ट्रेचर देखते ही हर्ष का गला सूख गया। उसने टॉर्च से सामने देखा तो वहाँ कुछ भी नहीं था, पर जैसे ही उसकी टॉर्च की रोशनी उसके सामने वाली दीवार पर गई ,तो उसे अपनी परछाई के पीछे एक औरत की परछाई दिखी। वो फिर से एक झटके से पलटा तो वहाँ फिर से कोई नहीं दिखा। उसने फिर से उसी दीवार पर दुबारा से टॉर्च मारी। फिर से उसे वही परछाई दिखाई दी।

वो देखते ही हर्ष धीरे-धीरे डरता हुआ पीछे हटने लगा। हर्ष जितना पीछे हटता गया , परछाई उसे उतने ही उसके पास आती दिख रही थी। उसने काँपते हुए बोला, “कोन है वहाँ?” तभी एक तेज़ हवा चलने जैसी आवाज आई और दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। अब उस मूर्दाघर रूम की टिमटिमाती ट्यूबलाइट भी बंद हो गई थी। बस अब खाली उस मूर्दाघर में टॉर्च की ही रोशनी थी। हर्ष लाइट जलाने के लिए स्विच बोर्ड के पास गया। उसने स्विच ऑन करने के लिए जैसे ही अपनी उंगली आगे करी, उसे एक ठंडक सी महसूस हुई। जैसे ही उसने टॉर्च ऊपर कर के देखा तो उसे वही स्ट्रेचर वाली महिला वहाँ पे खड़ी मिली।

आँखें एक जगह रुकी हुई और मुँह खुला हुआ और उसमे से ठंडी भाप निकल रही थी जैसे वो साँस ले रही हो। उसे देखते ही हर्ष के पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गई। उसने काँपते हुए बोला, “तु-तुम तो मर चुकी हो, फिर यहाँ कैसे?” वो औरत मुस्कुराते हुए बोली, “मौत तो तुम्हारे कमरे में ही है।” इतना बोलते ही उस औरत की आँखें पूरी सफ़ेद हो गईं। और उसका शरीर पीछे की तरफ़ मुड़ गया और अपने हाथ और पैरों से उल्टी दिशा मेंचलने लगी हर्ष को देखते हुए। हर्ष चीखता हुआ भागा। उसने ज़ोर-ज़ोर से मूर्दाघर के दरवाज़े पर घूंसे मारे पर दरवाज़ा नहीं खुला।

तभी उसने पलट के देखा तो वो औरत सामने से उसके पास आ रही थी। उसने उसका ध्यान भटकाने के लिए उस औरत के बोतल फेंक के मारी और खुद टेबल के नीचे साँस रोक के बैठ गया। उस औरत ने हर्ष को ढूँढा और फिर ग़ायब हो गई। उसके ग़ायब होते ही एकदम सन्नाटा हो गया। हर्ष ने टेबल के नीचे से झाँक के देखा तो अब उस मूर्दाघर में कोई नहीं था। उसके मन को शांति मिली कि वो औरत वहाँ नहीं थी। पर तभी एकदम से टेबल के ऊपर धम की आवाज हुई। वो टेबल से बाहर ही निकलने वाला था कि तभी वो औरत टेबल के ऊपर बैठ कर उसे नीचे झाँकने लगी।

हर्ष उसे देख के पागलों की तरह चिल्लाने लगा। तभी वो औरत मुस्कुराई और बोली, “मैं तो तुम्हें अपने साथ सुलाने आई हूँ।”हर्ष डरते हुए झटके से पीछे हट गया तभी उस औरत की आँखें सफ़ेद से काली हुईं और हर्ष उसकी उसी काली आँखों में क़ैद हो गया और पूरे मूर्दाघर में अँधेरा हो गया। कुछ ही सेकंड में मूर्दाघर की सारी ट्यूबलाइट एक झटके से जल गई, पर अब वहाँ पे चार की जगह पाँच स्ट्रेचर थे और वो पाँचवाँ स्ट्रेचर किसी और का नहीं बल्कि हर्ष का ही था और उसकी स्लिप पे लिखा था बॉडी नं. 47, उम्र 28, मौत की वजह अनजानाहादसा।”
निष्कर्ष (Conclusion):
रात में सुनसान अस्पताल के मुर्दाघर में ड्यूटी कर रहा इंटर्न डॉक्टर हर्ष, एक मृत महिला का रिकॉर्ड बनाते हुए डर की घटनाओं का अनुभव करता है। पहले उसे लगता है कि लाश में जान है, फिर उसे परछाई दिखती है। जब वह महिला की आत्मा को अपने सामने खड़ा देखता है, तो डरकर भागने की कोशिश करता है। आखिर में, वह भयानक रूप से उसी आत्मा का शिकार हो जाता है, और उसकी लाश मुर्दाघर के पाँचवें स्ट्रेचर पर मिलती है, जिसकी मौत की वजह ‘अनजाना हादसा’ लिखी जाती है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे डर और अलौकिक शक्तियों का सामना करने वाला व्यक्ति स्वयं ही उसका शिकार बन जाता है।
