होली पर जगा मंदिर का शव Horror stories

होली का दिन आ गया था और सारे लोग होली के त्योहार में व्यस्त हो रखे थे। बच्चे अलग-अलग रंग के गुब्बारों और रंगों से खेल रहे थे। और बड़े लोग कोई घर सजाने में व्यस्त था तो कोई होली के लिए पकवान। होली के त्योहार के कारण गाँव में एक ख़ुशी का माहौल था। एक जवान लड़का जिसका नाम राजन था, वह कुछ दिनों पहले ही बाहर शहर से अपने गाँव वापस आया था। अपने पुराने बचपन के दोस्तों से मिलने और इस बार उसने सोचा कि इस साल की होली गाँव में मनाऊँगा, तो यह सोचकर खुश था। जैसे ही शाम होती गई, पूरे मौसम मेंकुछ अलग सा एहसास सा लगने लगा।

वह मौसम देखके सारे लोग घबरा भी गए। रात होते-होते सारी ख़ुशी और रंग कम होते गए। अब पूरे गाँव में सिर्फ़ शांति ही शांति थी। पर राजन ने बस यही सोचा कि यह एक बस मौसम के कारण ही है, डर जैसा और कुछ नहीं, लेकिन उसके दोस्तों को वह सब चीज़ें देखके डर लग रहा था। खासकर आरव को जो कुछ ज़्यादा ही डरा हुआ था और ऐसा लग रहा था कि कुछ तो गड़बड़ होने वाली है। “अरे तुम लोगों ने उस मंदिर को देखा? इतने अँधेरे में वह भी कितना डरावना लग रहा है, जैसे कि वहाँ कोई जाता ही न हो।” राजन बोला, “अरे यार, यह सब होली के कारण है।

पता नहीं लोग बिना बात के फ़ालतू में डरते रहते हैं।” तभी बोनफायर बुझ गया और सारे लोग अपने-अपने घर में चले गए। अब हर जगह सिर्फ़ सन्नाटा ही सन्नाटा। बस घर के बाहर तीन दोस्त – विक्रम, आरव और राजन – उन तीनों ने मिलकर एक योजना बनाई कि चलो आज हम तीनों उस पुराने खंडहर मंदिर के अंदर चलते हैं। अब वह तीनों दोस्त मंदिर के पास तक पहुँच गए थे, पर उन तीनों ने देखा कि मंदिर के दरवाज़े पर कोई इंसान खड़ा है जो दिखने में लम्बा और पतला सा है और उसका चेहरा लम्बे बालों से ढका हुआ था और वह काले रंग की फटी चादर पहने हुआ था।

वह इंसान ऐसा लग रहा था जैसे कि उसे पता हो कि वह तीनों यहाँ आने वाले हैं। आरव ने बोला, “यार विक्रम, यह कोई है।” विक्रम तो कुछ नहीं बोला पर राजन ने बोला, “अरे कोई शराबी होगा। होली का टाइम है न, तो नशे में यहाँ आके खड़ा हो गया होगा। तुम लोग उसपे ध्यान न दो, चलो हम आगे चलते हैं।” जैसे ही वह तीनों आगे बढ़े, तभी वह लम्बे बाल वाला इंसान बोला, एक भयानक आवाज़ में, “आज की रात इस गाँव का अंतहोगा।” राजन हँसने लगा और बोला, “लगता है कुछ ज़्यादा ही पी ली है तुमने जो उल्टा-सीधा बोलने लग रहे हो।

” उस इंसान ने कुछ भी नहीं बोला, सिर्फ़ अपनी गर्दन हिलाई और मंदिर की तरफ़ इशारा किया और बोला, “आज के ही दिन मंदिर का शाप उठेगा।” फिर वह एकदम से घूमा और बिना कुछ कहे ग़ायब हो गया। उसके ग़ायब होते ही वह तीनों बस एक-दूसरे को ही देखते रह गए। उन दोनों दोस्त में से आरव बोला, “तुम दोनों मेरी बात मानो, मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है। मेरी बात मानो और दोनों चलो यहाँ से।” राजन ने आरव को बोला, “तू क्यों डर रहा है? वह एक बस पागल आदमी था। चल, अगर तुझे सच में वापस चलना है तो चल, ठीक है, वापस गाँव चलते हैं।

” वह तीनों वापस गाँव अपने घर आने लगे। उन तीनों ने देखा कि गाँव के रास्ते कुछ अजीब से लग रहे थे और न कोई इंसान दिख रहा था, और इंसानों के साथ-साथ सब लोगों के घरों में भी अँधेरा था। जैसे-जैसे वह गाँव के चौक के पास पहुँचे, उन तीनों ने चारों तरफ़ देखा, पूरे गाँव में बस सन्नाटा और अँधेरा और उसके अलावा और कुछ भी नहीं। तीनों बहुत बुरी तरीके से डर गए। तभी आरव बोला, “अरे आज यह क्या हो रहा है? गाँव का कोई भी इंसान दिख नहीं रहा है और सब के घरों में अँधेरा भी है। आज तक नहीं हुआ है ऐसा।

कहीं ऐसा तो नहीं जो इंसान हमें मंदिर के बाहर मिला था, उसकी बोली हुई बात पूरी होने वाली हो।” तभी उन तीनों को एक डरावनी चीज़ सुनाई दी। तीनों बिना कुछ सोचे-समझे वापस भागते हुए मंदिर पहुँचे। अब मंदिर के पास वह पहले वाला इंसान नहीं, बल्कि एक औरत खड़ी थी। उस औरत का चेहरा पीला और बहुत डरावना था। उसके कपड़े फटे हुए थे और उसके बाल खून से सने हुए थे। पर उसके साथ-साथ उसके पीछे कोई परछाई भी दिख रही थी। आरव ज़ोर से चिल्लाया उस परछाई के ऊपर, “उससे दूर रहो,” और भागते हुए उस औरत के पास गया।

जैसे ही वह उस औरत के पास गया तो वह औरत नीचे गिर पड़ी। जैसे ही उन लोगों ने उस औरत को देखा तो वह औरत काँप रही थी और उसकी आँखें पलट गई थी और साथ ही उसके दिल ने धड़कना बंद कर दिया था। तभी ज़मीन हिलने लगी, मंदिर का दरवाज़ा अचानक से खुला और फिर उस मंदिर में से एक डरावनी आवाज़ आई। वह आवाज़ कोई ऐसी-वैसी आवाज़ नहीं थी, बल्कि उस पुराने मंदिर के अंदर से जागने वाले शाप के साये की थी।

वह साया मंदिर से बाहर निकला और हवा में फैल गया। उस साये की आँखों में एक अलग सी लाल आग जल रही थी और वह परछाई धीरे-धीरे बोलने लगी, “तुम सब लोगों ने मुझे जगा दिया है। अब तुम सब में से कोई नहीं बचेगा।” उस साये ने उन सब के चारों तरफ़ इतना धुआँ कर दिया कि उन सब को साँस लेने में दिक्कत होगी और वह सब वहीं मर गए।
निष्कर्ष (Conclusion):
राजन, आरव, और विक्रम ने होली की रात गाँव के सन्नाटे और अजीब माहौल के बीच, एक खंडहर मंदिर जाने की योजना बनाई। मंदिर के द्वार पर उन्हें एक रहस्यमय, लम्बे बालों वाला व्यक्ति मिला जिसने गाँव के “अंत” और मंदिर के शाप के उठने की भविष्यवाणी की। राजन ने इसे मज़ाक समझा, पर उसके दोस्तों को डर लग रहा था। जब वे वापस गाँव पहुँचे, तो उन्होंने पाया कि पूरा गाँव सुनसान और घरों में अँधेरा था, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई। डरकर वे वापस मंदिर भागे, जहाँ उन्होंने एक डरावनी, घायल-सी महिला को देखा। जैसे ही महिला गिरी और मर गई, भूकंप आया, मंदिर का दरवाज़ा खुला और शाप का साया बाहर निकल आया। लाल आँखों वाले उस भयानक साये ने ज़हरीला धुआँ फैलाकर तीनों दोस्तों को मार डाला, जिससे यह भविष्यवाणी सच हो गई कि उस रात गाँव का अंत होगा।
