New Scary Stories Stories Yakshini ka khauf Horror Story New Scary Stories Series 31

Yakshini ka khauf Horror Story New Scary Stories Series 31

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Yakshini ka khauf Horror Story


इस कहानी में हम एक रवि नाम के लड़के के बारे में सुनेंगे जिसने 131 पुरानी किताब ढूंढी थी। उस पुरानी किताब में एक स्त्री के बारे में लिखा था जिसका नाम यक्षिणी था। उस स्त्री में ऐसी शक्ति थी जो सब इच्छाएं पूरी कर सकती थी, परंतु नियम तोड़ने पर वह उस इंसान को भयंकर दंड भी देती थी। रवि को इन सभी बातों पर भरोसा नहीं था। उसने यह विचार किया कि इन सब बातों पर यकीन करने के लिए उसे वहां जाकर पता लगाना पड़ेगा क्या यह बात सच है या नहीं। रवि के दोस्तों ने उसे बहुत समझाया कि तुम्हें वहां नहीं जाना चाहिए वहां जाना ठीक नहीं है। पर रवि उनकी बात नहीं मानी।

रवि ने वहां जाने की तैयारी करी अपने बैग में टॉर्च, कैमरा रखा और साथ ही यक्षिणी को बुलवाने वाले मंत्र की एक पुरानी किताब रखी। रवि जंगल की ओर जा रहा था, रात का समय था 12:00 बज रहे थे। जंगल में ठंडी हवा चल रही थी और चारों ओर शांति छाई हुई थी, जो डरावना माहौल बना रही थी। रवि ने कुछ देर आगे चलने के बाद एक बड़े से पीपल के पेड़ के पास एक मंदिर देखा जो पुराना था और टूटा हुआ था।

रवि ने देखा कि उस पीपल के पेड़ की टहनी हवा में जोर-जोर से हिल रही है और उस पीपल के पेड़ के पास कोई भी नहीं था फिर भी रवि को एहसास हो रहा था कि कोई उसे देख रहा है। रवि ने अपनी बैग में से वह पुरानी किताब निकाली और यक्षिणी को बुलाने के लिए मंत्र पढ़ना शुरू कर दिया। तभी हवा जोरों से तेज चलने लगी और उस पुराने मंदिर में लगी घंटियां अपने आप बजने लगी। वहां चारों और अंधेरा हो गया और उस अंधेरे में पीपल के पेड़ के पास हल्की लाल रोशनी दिखाई देने लगी।

 

तभी वहां एक स्त्री चमकीली लाल साड़ी पहने आई जो दिखने में सुंदर थी। उसके बाल लंबे थे और उसकी आँखों का रंग काला एवं गहरा था लेकिन उसकी मुस्कान अजीब सी लग रही थी। यक्षिणी ने रवि की ओर देखा और धीरे से उससे पूछा कि तुम कौन हो? रवि डर गया और उसने डरते हुए यक्षिणी से बोला, “मैंने तुम्हारे बारे में पुस्तक में पढ़ा है कि तुम इच्छाएं पूरी करती हो, यह बात सच है या नहीं, यही जानने के लिए मैं यहां आया हूँ।” यक्षिणी ने कहा, “हाँ, मैं इच्छाएं पूरी करती हूँ। लेकिन उस इच्छा को पूरी करने के लिए तुम्हें तीन दिन के अंदर मेरी परीक्षा देनी पड़ेगी।”

अगर तुम उन तीनों परीक्षाओं में सफल हो गए तो मैं तुम्हें तुम्हारी मनचाही इच्छा पूरी कर दूँगी। लेकिन अगर तुम असफल हो गए तो तुम्हारी आत्मा इसी जंगल में भटकती रहेगी। रवि को यक्षिणी की यह शर्त मंजूर हो गई और वह परीक्षा देने के लिए तैयार हो गया। पहली परीक्षा देने के लिए यक्षिणी ने रवि को उस पुराने मंदिर के अंदर जाने के लिए कहा। जब वह मंदिर में गया वहां पर अंधेरा था और मंदिर का दरवाजा अपने आप बंद हो गया। तभी रवि को इंसानों की परछाइयां दिखने लगी जो कि बिना चेहरे की दिखाई पड़ रही थीं।

तभी यक्षिणी ने रवि से कहा, “अगर तुम्हें इस मंदिर से बाहर जाना है तो तुम्हें अपने आप ही बाहर जाने का सही रास्ता ढूंढना पड़ेगा।” रवि ने बाहर निकलने की बहुत कोशिश करी पर उसे कोई भी दरवाजा नजर नहीं आया। अचानक फर्श पर रवि को एक चमकता तीर दिखाई दिया। रवि तीर की दिशा में आगे बढ़ा, उसके पीछे चला, तभी एक दीवार को छूते ही तीर वहां से गायब हो गया। और उसी दीवार से रवि उस मंदिर से बाहर आ गया। यक्षिणी ने मुस्कुराते हुए रवि से कहा, “तुम अपनी पहली परीक्षा में सफल हो गए हो।”

जब रवि की पहली परीक्षा पूरी हो गई तो यक्षिणी ने उसे दूसरी परीक्षा देने के लिए कहा। दूसरी परीक्षा इस प्रकार थी: यक्षिणी ने रवि को मंदिर के पास बने एक कुएं के पास बुलाया। उस कुएं में एक रहस्यमय शक्ति थी। यक्षिणी ने रवि से कहा, “तुम्हें इस कुएं मे झांकना है। कुएं में झांकने पर तुम्हें तुम्हारी परछाई डरावनी नजर आएगी, अगर तुम उससे नहीं डरे तो तुम इस कुएं को पार कर पाओगे।” जब रवि ने कुएं में झाँका तो उसे अपना चेहरा बहुत भयानक नजर आया और उसकी आँखें लाल दिखाई पड़ रही थीं।

तभी उस परछाई ने रवि की ओर अपना हाथ बढ़ाया और उसे अपनी ओर खींचने लगी पर रवि ने भी हार नहीं मानी परंतु अपनी पूरी ताकत उससे बचने के लिए लगा दी और साथ ही वह मंत्र भी पढ़ने लगा। फिर धीरे-धीरे परछाई गायब होने लगी और इस प्रकार रवि इस परीक्षा में भी सफल हो गया। यह देखकर यक्षिणी रवि की ओर देखकर मुस्कुराई और उससे कहा, “अब तुम आखिरी परीक्षा के लिए तैयार हो जाओ।” यक्षिणी ने रवि को एक पत्थर दिखाया और कहा, “तुम्हें उस पर बैठे रहना है। अगर तुम बैठे रहे तो तुम जीत जाओगे,

लेकिन अगर तुम डर गए और इस पत्थर पर से उठ गए तो तुम्हारी आत्मा हमेशा के लिए मेरे वंश में हो जाएगी।”रवि जब पत्थर पर बैठ गया तो उसे डरावनी आवाजें सुनाई आने लगीं। उन आवाजों में उसे अपनी मां की आवाज़, परिवार वालों की आवाज़ और अपने दोस्तों की आवाज सुनाई आ रही थी जो कि बहुत डरावनी थी। उसे ऐसा लग रहा था मानो उसकी मां और उसके दोस्त बहुत भयानक रूप से हंस रहे हैं। तभी उसे यह भी महसूस हुआ कि मानो उसके चारों ओर आग लग गई है और आग की लपटें तेजी से बढ़ रही हैं। यह सब महसूस करने पर रवि का दिल जोर जोर से धड़कने लगा मानो उसकी सांसें थम गई हों।

लेकिन रवि ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी। उसने अपनी आंखें बंद करी और यह सोचा कि यह सब मेरा भ्रम है और कुछ नहीं। और उसे इन सभी चीजों से डरने की जरूरत नहीं है। उसके इतना सोचने पर सब कुछ एकदम शांत हो गया। और इस प्रकार वह अपनी तीसरी परीक्षा में भी सफल हो गया। तभी यक्षिणी उसके पास आई और बोली, “तुम अपनी तीनों परीक्षाओं में सफल हो गए हो।

 

अब बताओ तुम्हारी क्या इच्छा है और तुम्हें क्या चाहिए।” रवि ने कुछ देर सोचकर बोला कि मुझे अपार ज्ञान और शक्ति चाहिए।यक्षिणी मुस्कुराने लगी तभी रवि को लगा यह कुछ करने वाली है शायद मेरे साथ। तभी अचानक से रवि के सिर में तेज दर्द होने लगा, उसे लगा जैसे उसका दिमाग फटने वाला है उसकी आँखों के सामने कई परछाई आने लगीं। वो परछाएं देख के रवि का सिर की सारी नसें फट गईं और वो मर गया, तभी यक्षिणी ने रवि की आत्मा को पकड़ लिया और अपने साथ ले गई।

निष्कर्ष… Conclusion

रवि ने यक्षिणी की शक्तियों की सच्चाई जानने के लिए अपने दोस्तों की चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर दिया। उसने तीन भयानक परीक्षाओं का सामना किया, जिन्हें उसने अपनी हिम्मत और तर्क से पार कर लिया। सफल होने पर, उसने यक्षिणी से अपार ज्ञान और शक्ति माँगी। यक्षिणी ने उसकी इच्छा पूरी तो की, लेकिन ज्ञान और शक्ति की वह मात्रा रवि का शरीर और मन सहन नहीं कर सका। भयंकर दर्द और मानसिक आघात से उसकी नसें फट गईं और वह मर गया। अंत में, यक्षिणी ने रवि की आत्मा को अपने वंश के लिए पकड़ लिया, यह साबित करते हुए कि उसकी इच्छाएँ पूरी करने की शक्ति के साथ जुड़ा दंड उतना ही भयंकर था जितना कि कहानी में बताया गया था।

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