Karwachauth Story

शहर में एक जगह थी—गगन विहार। वहाँ करीब बारहवीं मंज़िल पर रोशनी नाम की एक औरत अपनी बालकनी में खड़ी थी, जो चाँद निकलने का इंतज़ार कर रही थी, क्योंकि आज करवा चौथ था। और यह उसका पहला ही करवा चौथ था। शायद इसी वजह से उसके हाथ काँप रहे थे।अब वह खड़े-खड़े दो चीज़ों का इंतज़ार कर रही थी—पहला था चाँद, दूसरा था उसका आदमी, जिसका नाम था आरव। और उसके फ़्लैट में हल्की-फुल्की ही लाइट जल रही थी। रोशनी को बस ऐसा लग रहा था कि दोनों चीज़ें जल्दी से आ जाएँ—चाँद और आरव।

उसने आरव को कॉल करने के लिए सोचा। जैसे ही उसने फ़ोन उठाया, फ़ोन में नो सिग्नल आ रहा था। रोशनी ने मन ही मन बोला, “आरव, जल्दी आ जाओ ना! चाँद निकलने वाला है और मुझे अब भूख भी लग रही है।” लेकिन जब वहाँ कोई था ही नहीं, तो उसकी आवाज़ उसी को ही आनी थी। इंतज़ार करते-करते आखिरकार ग्यारह बज गए, पर आरव अभी तक नहीं आया था। लेकिन रोशनी को चाँद निकलते हुए दिख गया था।

चाँद देखते ही रोशनी ने छलनी उठाई, और वहीं पर खड़े होकर उसने उस छलनी से आसमान में चाँद की तरफ़ देखा। हल्के-हल्के बादलों के बीच में हल्का-हल्का चाँद दिख रहा था।वह उस चाँद को देखकर ख़ुश हुई। जैसे ही उसने उस छलनी में से उस चाँद को ध्यान से देखा, तो जो उसे दिखा वह देखकर वह काँप गई। छलनी में चाँद नहीं दिख रहा था। उसे चाँद की जगह एक चेहरा दिखा—वह दिखने में काली परछाईं जैसा था, उसकी लाल आँखें और एक डरावनी मुस्कान। उस परछाईं को देखते ही उसकी छलनी ज़मीन पर गिर गई और उस छलनी की आवाज़ पूरे उसके फ़्लैट में गूँजगई।

तभी वह अंदर गई दूसरा फ़ोन लेने। उसने उस फ़ोन को देखा तो उसमें भी नो सिग्नल आ रहा था। फिर एकदम से किसी चीज़ के गिरने की आवाज़ आई—किचन से।रोशनी किचन की तरफ़ गई तो उसके लॉबी की लाइट झिलमिल होने लगी। उसने किचन में देखा तो बस नीचे एक स्टील की प्लेट गिरी हुई थी। न तो उस प्लेट के पास कोई था और न ही उस पूरे किचन में। रोशनी को फिर एक आवाज़ आई, पर अब वह आवाज़ किसी बर्तन की नहीं थी, बल्कि बहुत भारी साँसों की आवाज़ थी। उसने जल्दी से पलटकर देखा—फिर से उसे कोई नहीं दिखा।

अब बालकनी के पर्दे खुद-ब-खुद हिलने लगे थे। उसने अपने फ़्लैट में से ही खड़े होकर अपनी बालकनी में देखा, तो वह नज़ारा देखकर चौंकगई।फिर से वही परछाईं अब बालकनी में खड़ी थी और रोशनी को ही घूर रही थी। अब उसके दिमाग़ में एक बात चल रही थी कि “मैं तो बारहवींमंज़िल पर रहती हूँ, तो यहाँ कोई कैसे आ सकता है?”वह डर के मारे चीख़ने ही वाली थी कि तभी उसके दरवाज़े की घंटी बज गई। उसने लंबी साँस ली और धीरे से बोली, “चलो, आरव आ गया।” वह भागकर गई और जल्दी से दरवाज़ा खोल दिया।

उसने देखा तो वह सच में आरव ही था। रोशनी बोली, “आ गए? तुम इतने लेट!” आरव थोड़ा थका हुआ गेट पर ही खड़ा था। थोड़ा-सा मुस्कुराते हुए बोला, “हाँ, सॉरी। थोड़ा लेट हो गया। कुछ ऑफ़िस में इम्पोर्टेन्ट काम में फँस गया था।”तभी रोशनी ने आरव की आँख में देखा, तो उसकी आँख की पुतली ही अलग थी—एकदम लाल, चमकती हुई पुतली, वैसे ही जैसे उसने छलनीमें देखी थी। उसकी आँख देखकर रोशनी फिर डर गई और बोली, “तुम ठीक तो हो ना?” आरव मुस्कुराया और बोला, “अरे, मैं बिल्कुल ठीक हूँ। मुझे क्या होता? क्या हुआ? ऐसे क्यों देख रही हो?”

उसकी बोलती एकदम से बंद हो गई और वह डर के मारे पीछे हट गई। अब आरव अंदर आ गया और रोशनी को बोला, “वैसे भी बहुत लेट हो गए हैं। चाँद निकल आया है, चलो व्रत खोल लो।”व्रत खोलने के लिए रोशनी ने पानी का ग्लास उठाया, लेकिन पानी के ग्लास में रोशनी का चेहरा तो था ही नहीं, बस आरव का था, और वह भी उल्टा।वह डर के पीछे हट गई और डरती हुई बोली, “तुम आरव नहीं हो ना?” आरव ने हल्के से मुस्कुराते हुए बोला, “तो फिर मैं कौन हूँ, रोशनी? बताओ।”

2 तभी एक सेकंड में लाइट बंद हो गई। अब पूरे फ़्लैट में सिर्फ़ अँधेरा था। तभी रोशनी ने अपने मोबाइल की फ़्लैश लाइट जलाई। लाइट जलते ही वह काँप गई, क्योंकि सामने अब आरव नहीं था, बल्कि उसके ख़ाली कपड़े लटक रहे थे, बिना किसी शरीर के। तभी उस अँधेरे में आरव की आवाज़ आई, “मैं वही हूँ, जिसे तुमने छलनी से देखा था।” डर के मारे रोशनी का मोबाइल नीचे गिर गया।वह डर के मारे पीछे हटी और भागकर अपने बेडरूम में चली गई और दरवाज़ा बंद करके काँपते हुए रोने लगी। “हे भगवान, मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है?” रोशनी अपने दरवाज़े से लगकर नीचे बैठ गई। उसका दिल डर के मारे ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।

अब बाहर भयानक सन्नाटा हो गया था। तभी दरवाज़े पर खटखटाने की आवाज़ आई—तीन बार। उसके बाद आरव बोला, “रोशनी, व्रत तोड़ लो। भूख लग रही होगी।” वह आवाज़ आरव की खुद की आवाज़ नहीं थी। रोशनी ने डरते हुए उससे बोला, “तुम मेरे पति आरव नहीं हो।” इतने बोलते ही बाहर एक डरावनी हँसी की आवाज़ गूँज उठी।अब आवाज़ गेट से नहीं, बल्कि उसकी छत से आई। “बस आज तुम्हारे प्यार के व्रत ने मुझे शरीर दे दिया है। मेरा शरीर… अब आरव का शरीर है।“

3रोशनी ने जैसे ही नीचे ज़मीन पर देखा तो गहरे लाल रंग की एक छोटी-सी बूँद पड़ी थी, जो धीरे-धीरे खिसकते-खिसकते दरवाज़े के नीचे से निकल गई। एकदम से उसे अपने बेड पर फिर किसी की परछाईं दिखी। उसने जब पलटकर देखा तो अब आरव उसी बेड पर सो रहा था, वह भी गहरी नींद में। रोशनी को यह देखकर थोड़ी राहत सी मिली।रोशनी ने आरव को धीरे से बोला, “आरव?” तभी आरव की आँख खुली। फिर रोशनी ने बोला, “तुम ठीक तो हो ना?” पर तभी उसकी नज़र आरव के होंठों पर गई तो उसके होंठों पर लाल, सूखा खून जैसा कुछ था और रोशनी को आरव के दाँत थोड़े लंबे और नुकीले लग रहे थे।
4रोशनी को देखकर आरव उठा और रोशनी को पानी का ग्लास दिया व्रत तोड़ने के लिए। जैसे ही रोशनी ने ग्लास में झाँका, अब पानी में रोशनी का चेहरा था, और उसके चेहरे के साथ-साथ, ठीक रोशनी के चेहरे के पीछे वही लाल आँखों वाली परछाईं दिख रही थी।रोशनी ने ग्लास को तुरंत नीचे फेंक दिया और आरव को देखकर बोला, “तुम अभी तक यहीं हो?” अब आरव के चेहरे की मुस्कान चली गई थी। और आरव ने रोशनी के क़रीब आकर उसको कसकर पकड़ लिया था, और उसकी पकड़ से रोशनी की साँस धीरे-धीरे बंद होने लगी। तभी आरव उसके कान में बोला, “मैं वही हूँ, जिसे तुम हमेशा से देखती आ रही थी। और अब… मैं तुम्हारे साथ ही रहूँगा… हमेशा।“धीरे-धीरे रोशनी की सारी साँसें बंद हो गईं और वह मरगई थी।
निष्कर्ष (Conclusion):
रोशनी का पहला करवा चौथ एक भयानक अंत लेकर आया। जिस परछाई और डर का वह सामना कर रही थी, वह आखिरकार उसके पति आरव के रूप में आई। रोशनी ने अपने व्रत के कारण अनजाने में एक आत्मा को आरव का शरीर दे दिया। अपने पति को पहचानने की कोशिश में, वह धोखे में आ गई और अंत में, वह शक्ति ने उसे मार डाला। यह कहानी बताती है कि रोशनी का डर सच हो गया और उसके अंत तक वह अकेली और असहाय रही।
