ANDHERA KA SHRAAP HORROR STORY

बचपन से साथ रहने वाले पाँच दोस्त शेखर, राहुल, मनीष, गौरव और दीपक जो हमेशा से मस्ती में और खुश रहा करते थे। उन सभी को उनके किसी गाँव वाले ने बताया था उस पुरानी हवेली के बारे में जो बहुत दिनों से बंद है। उस गाँव वाले ने यह भी बताया था कि जो वहाँ अब तक गया है आज तक वापस नहीं आ पाया। उस गाँव वाले ने उनसे यह भी बोला कि तुम लोग भी भूल के वहाँ मत चले जाना क्योंकि वहाँ जाने वाला या तो मर जाता है या पागल हो जाता है। लेकिन वो पांचों दोस्त किसी की बात कहाँ मानने वाले थे, निकल गए उसी हवेली की तलाश में।

चारों तरफ़ सिर्फ़ बड़ी-बड़ी झाड़ियाँ और एक एकदम सुनसान रास्ता आगे बढ़ते-बढ़ते आखिरकार वो उस हवेली के पास पहुंच ही गए। पांचों दोस्त जैसे ही अंदर गए, अंदर एकदम घुप अंधेरा और मकड़ी के जाले और हल्की-हल्की हवा सी चलती महसूस हो रही थी। उस हवा को महसूस करते ही उनको और डर लगने लगा, जैसे ही वो थोड़ा आगे बढ़े, मनीष ने तुरंत बोला, “ऐसा लग रहा है जैसे हम लोगों के साथ कोई और भी हो।” तभी शेखरबोला, “अरे ऐसा नहीं है बस वो गाँव वाले ने जो हमें बताया था वो बात तेरे मन में बैठ गई है।

1″ लेकिन तभी पीछे से एक भयानक आवाज सी आई और एक कमरे की खिड़की खुल गई और हिलने लगी। दीपक वहाँ से बाहर की तरफ़ भागने लगा तभी उसके दोनों पैर किसी ने पकड़ लिए और उसे नीचे गिरा के खींचने लगा। राहुल ने भागके दीपक को बचाने की कोशिश की लेकिन तभी वो परछाई उन लोगों के सामने आके खड़ी हो गई और ज़ोर से चीख़ के बोली, “यहाँ से चले जाओ नहीं तो सब मरोगे।” एकदम से उन चारों के सामने दीपक आ गया, वो भी हवा में उड़ता हुआ। हवा में उड़ते-उड़ते वो दीवार से ज़ोर से टकराया और नीचे गिरते ही उसकी गर्दन टेढ़ी हो गई और वो मर गया।

दीपक की ऐसी हालत देख के वो चारों दोस्त बहुत ही ज़्यादा डर गए थे। वो सभी के सभी दरवाज़े की तरफ़ भागे पर उन लोगों को यह नहीं पता था कि वो ही परछाई उन लोगों के पीछे-पीछे आ रही है। और उसकी लाल आँखें गुस्से से और लाल हो गई थी। गौरव ने उसकी तरफ़ देखा और बोला, “ये कोई इंसान नहीं है बल्कि कोई आत्मा है।” उन लोगों ने रुककर देखा कि एक कमरे की दीवार पर खून से लिखा था कितुम लोग अब नहीं बचोगे। वो पढ़ते ही गौरव की डर से साँसें तेज हो गईं। तभी उन सभी के कानों में एक आवाज़ आई कि तुम लोगों ने यहाँ आके बहुत बड़ी गलती करदी थी,

अब तुम लोग मुझसे बच नहीं सकते। उन सभी ने उसकी आवाज़ सुनकर फिर से ज़ोर-ज़ोर से भागना शुरू कर दिया। लेकिन एकदम से दरवाज़ा खुद ही बंद हो गया जैसे किसी ने अपनी शक्ति से करा हो। तभी उन्हें फिर आवाज़ आने लगी पर इस बार आवाज़ किसी के हँसने की और रोने की थी और वो आवाज़ पूरे हवेली में गूंज रही थी। वो आवाज़ सुनते ही चारों के चारों ज़ोर-ज़ोर से दरवाज़ा बजाने लगे लेकिन उन सबसे पीछे खड़े राहुल की चीख़ निकल गई। जब उन तीनों ने पीछे देखा तो अब उस आत्मा ने राहुल को भी हवा में उड़ा दिया था।

उसके शरीर का आधा हिस्सा मुड़ चुका था, ऐसा लग रहा था जैसे कि उसकी सारी हड्डियाँ तोड़ दी हों। और उसकी आँखों से खून भी निकल रहा था। कुछ ही सेकंड में वो भी नीचे गिरा और मर गया। अब बस उन पांचों में से बस तीन दोस्त ही बचे थे पर उन तीनों को बाहर जाने के लिए खिड़कीदिख गई थी। वो तीनों उसमें से कूदकर बाहर भागे। तभी उन तीनों को उस हवेली में से फिर से किसी के हँसने की आवाज़ आई और साथ ही साथ वो आत्मा बोली, “अब फिर मिलेंगे।” इस तरह से वो तीनों दोस्त सही-सलामत अपने घर पहुँच पाए और उस किस्सेके बाद वो कभी रात में कहीं नहीं गए।
Conclusion
इस भयावह घटना से उन तीन दोस्तों को यह सबक मिला कि बड़ों की चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए और रोमांच के लिए जान जोखिम में डालना मूर्खता है। अपने दो दोस्तों को खोने के बाद वे हमेशा के लिए बदल गए और उस रात के बाद उन्होंने फिर कभी रात में अकेले बाहर कदम नहीं रखा, क्योंकि उस पुरानी हवेली की भयानक यादें और आत्मा की धमकी उनके मन में हमेशा के लिए बस गई।
