Haunted Factory Vlog – The Lady in Red
एक शहर जहाँ पे एक पुरानी हवेली थी जहाँ ना कोई जाता था और ना ही वहा कुछ कम चलता था एक दिन की बात है रिया और तन्वी दो पक्की दोस्त अपनी स्कूटी से उसी हवेली के रास्ते जा रही होती है जैसे ही वो उस हवेली के पास पूछती है। तन्वी उस हवेली को देख कि डर जाती है और बोलती है रिया हमे यहाँ से निकल ही जाना चाहिए । रिया बोली अरे तू पागल है की क्यू डर रही है कुछ न्ही होने वाला ।दोनों मिलके विलग बनायेगे और उसका नाम रखेगे भूतिया फैक्ट्री विलग फिर देख कल ही कल मैं वायरल हो जाएगी वीडियो ।

फिर जिसे ही वो दोनों अपनी स्कूटी रोक के उस फैक्ट्री कि पास गई तो वहाँ लिखा था की यहाँ आना माना है और उसके नीचा कुछ तारीक भी थी ।शायद 1989 धूल जमी वि थी दरवाज़े पे तो साफ़ साफ़ कुछ समज न्ही आ रहता । फिर भी रिया ने हिम्मत करके दरवाज़े को खोल दिया अंदर गए तो अंदर अँधेरे मैं टूटे वे शीशे और गली वी दीवार थी ।यह सब देख कि रिया बोली देख तू वसा ही डर रही थी यहाँ कोई भूत नहीं है बस खाली और बंद होने के मारे लोग भाग अफ़वा फलाते है , बस फिर रिया ना अपना व्लॉग बनना सुरु कर दिया की आज जहाँ हम आए है फैक्ट्री मैं जहाँ जाता है की यहाँ कोई लाल साड़ी वाली औरत का भूत रहता है ।

उन दोनों की रिकॉर्डिंग चल ही रही थी की तभी उन दोनों को एसा लगा जैसे किसी ना बोला हो धप्प पहले तो दोनों डर गई फिर रिया ने बोला अरे कुछ नहीं है बस कोई चीज गिरी होगी । रिया ने उससे बोल तो दिया पर वो भी डर कि मारे काप रही थी । उस आवाज को इग्नोर करके वो दोनों फिर से आगे भड़ने लगे आगे चलते चलते उन दोनों ने देखा की दीवारों पुराने पोस्टर्स लटके वे है और जो मशीन पहले चलती थी अब बंद पड़ी थी थोड़ा और चलते उन दोनों ने देखा कुछ दीवारों पे हिलता नज़र आया जिसे ही तन्वी ने कैमरा उस दीवार की तरफ़ किया तो दीवार पे उस पोस्टर मैं कुछ लाल सा हिल रहा था ।

रिया वो देख शायद उस पोस्टर मैं लाल साड़ी हिल रही थी । रिया ने मोबाइल की फ़्लैशलाइट से देखा पर कुछ भी न्ही था । शायद किसी चीज की परछाई होगी छोड़ भी ,पर अब वो खुद भी डर चुकी थी । फिर दुबारा से वो दोनों आगे बड़े थोड़ा आगे चले तो उन्हें टूटा वा शीशा मिला ,तो रिया ने बोला शीशा देख कि तो लगता है की या उसी लाल सारी वाली का होगा , रिया बोली अगर डर न्ही लगता तो या लाइन कैमरा मैं बोल ,तन्वी भी मुस्कराती हुए बोली अरे डर नहीं आगे वो कुछ बोल पाती तभी शीशे के पीछे उस कोई खड़ा मिला ऐसा लग रहा था जैसे वही औरत हो क्युकी वो भी लाल साड़ी मैं थी बालों से चहरा ढक्कावा था । रिया जोर से चिल्लाती भी बोली रिया जल्दी पीछा हाट

तन्वी ने जैसे पीछे पलट के देखा पर उसे वहाँ कोई नहीं देखा । दोनों उस जगह से भागती वि गेट के पास पूछी तो गेट बंद मिला ,उन्होंने गेट खोलने के लिया गेट कीचा तो गेट टस से मस नहीं हुआ । रोया ने तन्वी से बोला अब कैसे निकले यहाँ से ये गेट तो बंद होगा है । तभी अपर से फिर से आवाज आई , दोनों ने ऊपर की तरफ़ देखा , तभी तन्वी बोली वो आवाज शायद उसी औरत की ही है वो हमे ढूंड रही है रिया बोली चल पागल चल ऊपर चल कि देखते है क्या है वहाँ ।दोनों ऊपर जाने लगे पूरी सुनसान फैक्ट्री मैं उनकी बस चलने की आवाज फ़ेल रही थी ,ऊपर पोछते ही उनको एक कमरा मिला और उस कमरे के गेट पे लिखा था लेडीज़ स्टाफ़ रूम अंदर उस कमरे मैं से किसी के रोने की आवाज आ रही थी

तन्वी ने गेट पे मारा और बोला हेलो कोई है क्या यहाँ पे ,पर किसी भी तहर का कोई आवाज न्ही आई । बस बहुत हल्की हल्की सिसकियों की आवाज आ रही थी । रिया ने डरते डरते दरवाजा खोला पर कमरे मैं अँधेरा था पर कोने। मैं एक लाल सारी पहने एक औरत बैठी थी । चहरा बालों से ढाका वा था और बाल खुलेवा ज़मीन तक लटके वे थे जिसके वजह से उसका चहरा न्नहीं देख रहता , तन्वी ने धीरे से बोला मैम उस औरत ने अपने बालों के नीचे से छुपी वि लाल आखों से उन दोनों को देखा । रिया ने तन्वी का ज़ोर से हात पकड़ लिया और बोली ये क्या है और ये कोन है ,तन्वी ने डरते हुआ बोला देख वो हमे देख रही है अपनी लाल आखो से , उस औरत की आँखे इतनी लाल थी जैसे पता न्ही कितने गुस्से से भरी वि हो ।

उन दोनों को देख के उसने अजीब सी सास लीं और बोली तुम दोनों मेरी फैक्ट्री मैं क्यू आए हो । यह वही आवाज थी जो कुछ देर पहले उन दोनों ने सुनी थी । उसकी अवन इतनी भिहानक थी कि सारी पुरानी मशीन चलने लगी थी । और साथ ही साथ दीवारों पे नाखून की खरोंच जैसे निशान उभर आए । शिक्षा मैं अब दो नहीं बल्कि तीन लोग दिख रहे थे और वो तीसरा उन दोनों के पीछे न्ही बल्कि बीच मैं दिख रहता l रिया ने डरते डरते बस आख़िरी मैं तन्वी से एक ही शब्द बोला जल्दी से कमेरा उठा और अब निकलते है ।जैसे ही जैसे तैसे अपनी जान बचाके बाहर निकली । तन्वी की नजर ज़मीन पर गई तो उस औरत की परछाइ ज़मीन पे दिख रही थी तन्वी ने पीछे मुड़ कि छत पे देखा तो वो औरत धीरा धीरा आगे बढ़ रही थी । तन्वी ने रिया को बोला भाग रिया भाग वो हमारे पीछा आ रही है वो औरत छत से खुद के उन दोनों कि सामने आके खड़ी होगी और एक सफ़ेद धुन कि साथ उन दोनों को गायब के दिया
Conclusion
इस कहानी का नैतिक संदेश यह है कि कभी भी ऐसी जगहों पर घुसने का जोखिम नहीं लेना चाहिए, जो अपूर्ण और रहस्यमयी हों, क्योंकि हमें नहीं पता होता कि हमें क्या देखने को मिलेगा। रिया और तन्वी का आत्मविश्वास और हिम्मत कुछ समय के लिए उन्हें बचा सकता था, लेकिन अंत में डर और भूतिया घटनाएँ उन्हें यह समझाने में सफल हो जाती हैं कि अज्ञात और रहस्यमय जगहों से बचना ही समझदारी है।कहानी में एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि अफ़वाहों और डर के बीच कभी-कभी सच्चाई छुपी होती है, और अगर हम किसी बात को हल्के में लेते हैं, तो वह हमें गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है। रिया ने शुरुआत में मस्ती और वीडियो बनाने की बात की थी, लेकिन आखिरकार वह खुद उस सच्चाई का सामना करती है, जिससे वह बचना चाहती थी।
