The Curse Of Anklet (पायल का अभिशाप) Horror Story

काफ़ी रात हो चुकी थी। पूरा पहाड़ी रास्ता घने पेड़ों से ढका हुआ था। ऊपर आसमान में घटा छाई हुई थी, जिसके कारण चाँद की रोशनी भी बस हल्की-फुल्की ही दिख रही थी।ऐसे मौसम में सोनिया अकेली निकल पड़ी। उसके हाथ में बस उसके फ़ोन की फ़्लैशलाइट थी और कंधे पर उसका बैग। पर वह उस जंगल में न तो किसी के कहने पर और न ही खुद आई थी। उसका कहना था कि वह तो अपने कमरे में पढ़ रही थी और पढ़ते-पढ़ते उसकी पता नहीं कब आँख लग गई और जब उसकी आँख खुली तो वह अपने कमरे में होने की जगह उस पहाड़ी जंगल में चल रही थी।

एक तो वह जंगल इतना घना था, ऊपर से धुंध भी हो रखी थी कि उसे चलते-चलते आगे का कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह कौन-सी जगह चल रही है। पूरे जंगल में सिर्फ़ हर जगह बड़े पेड़ों के अलावा और कुछ भी नहीं था और वे पेड़ हवा से हिल रहे थे, जिनको देखते ही एक डर सा महसूस हो रहा था।सोनिया को चलते-चलते अचानक पीछे से पायल की हल्की सी आवाज़ आई। सोनिया एकदम से डर गई और बोली, “कौन है?” लेकिन फिर एकदम से शांति हो गई और कोई आवाज़ नहीं आई। पर उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे-जैसे वह चलती जा रही है, पायल की आवाज़ जैसे उसके पीछे आ रही हो।

जब पायल की आवाज़ ज़्यादा तेज़ होने लगी तो उसे कुछ समझ नहीं आया, बस उसने ज़ोर-ज़ोर से भागना शुरू कर दिया। पर वह जितनी ही तेज़ भागने की कोशिश करती, पायल की भी आवाज़ उतनी ही तेज़ होती जा रही थी। अब उसे ऐसा लगने लगा था जैसे कि कोई आत्मा पायल पहनकर उसका पीछा कर रहा हो।अब सोनिया उस पायल की आवाज़ से इतनी डर गई थी कि उसका दिल भी ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा था। कुछ दूर भागते-भागते उसे एक टूटा-फूटा मंदिर दिखा। उसने सोचा कि मैं वहाँ जाकर छिप जाती हूँ तो शायद इस पायल की आवाज़ से बच सकूँ।

जैसे ही वह मंदिर के अंदर गई, मंदिर के अंदर लगी घंटी अपने आप ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगी। उस घंटी की आवाज़ इतनी तेज़ हो गई कि उसे ऐसा लग रहा था कि उसके कान फट जाएँगे।वह आवाज़ सुनकर सोनिया पीछे हटी, तभी उस मंदिर के अँधेरे में से एक आवाज़ आई, “तू यहाँ क्यों आई है?” वह आवाज़ सुनते ही उसके पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गई। उसका पूरा शरीर काँप उठा। उसने दोबारा फ़्लैश जलाई मंदिर में देखने के लिए, पर मंदिर ख़ाली था। लेकिन जब उसने अपने उल्टी साइड देखा तो वहाँ पर लिखा था,

“जो यहाँ पे एक बार जाता है फिर वापस नहीं जाता।” सोनिया तुरंत पलटकर बाहर की तरफ़ भाग निकली।सोनिया ने मंदिर से भागकर दूसरी पगडंडी का रास्ता पकड़ लिया। लेकिन अब वही धुंध और बढ़ चुकी थी। अचानक से उसे उस धुंध के अंदर एक परछाई दिखने लगी—सफ़ेद कपड़े, खुले बाल और अँधेरे से ढका हुआ चेहरा। सोनिया ने काँपते हुए कहा – “तुम… कौन हो?”इतना बोलते ही वह परछाई उसके करीब आने लगी। उसे देखते ही सोनिया चीख पड़ी, क्योंकि वह परछाई हूबहू सोनिया जैसी थी—वही आँख, नाक, मुँह सब कुछ सोनिया के जैसा।

फिर वही सोनिया की परछाई बोली, “जो तू है वो मैं हूँ और जो मैं हूँ वो तू है।” सोनिया उसे देखकर बेहोश हो गई और नीचे गिर गई।जब उसे होश आया तो वह अब एक पुराने खंडहर से घर के अंदर पहुँच गई थी। वह घर इतना पुराना था कि उसकी दीवारें गल चुकी थीं और पूरे घर में बदबू ही बदबू थी और उस घर के हर तरफ़ से एक अजीब सी आवाज़ आ रही थी। अब उस घर की दीवार पर फिर से खून से लिखाथा, “अगर सुबह तक बच गई तो बाहर निकल जाएगी।”सोनिया ने उस घर का दरवाज़ा खोला और बाहर की तरफ़ भाग गई, मगर बाहर फिर से वही जंगल, वही सड़क, वही धुंध।

उसने घर के बाहर कदम रखा और पीछे मुड़ के देखा तो वह पुराना घर गायब हो गया था। उसके कानों में फिर से आवाज़ आई, “भाग मत, अब तू मेरी है।”सोनिया और तेज़ी से भागने लगी। अब उसे उस धुंध में एक नहीं, बल्कि बहुत सारी परछाइयाँ दिखीं। वे सब औरतें थीं और उन सबके चेहरे धुंध में छिपे हुए थे, लेकिन और सब की चाल एक जैसी थी—धीमी-धीमी, और उनके पैरों में से भी पायल की आवाज़ आ रही थी।सोनिया अब बहुत डर चुकी थी। तभी वह चिल्लाई, “मुझे छोड़ दो! जाने दो!” लेकिन अब एक की आवाज़ नहीं, बल्कि बहुत सारी आवाज़ें एक साथ मिलकर आईं, “अब तू यहाँ से कहीं नहीं जा सकती है।

“अचानक सोनिया को अपने पैरों में भारीपन महसूस होने लगा। नीचे देखा तो उसके पैरों में चाँदी की पायल बंध चुकी थी। वह हाँफने लगी। उसने पायल उतारने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह उसके पैरों में चिपक चुकी थी। हर कदम पर पायल की खनक खुद उसके पैरों से गूँजनेलगी। अब वह उस पायल को देखकर समझ गई थी कि वह पायल की आवाज़ जो इतने देर से वह सुन रही थी, वह और कहीं से नहीं, बल्कि उसके ही पैरों में से आ रही थी।तभी सोनिया को दूर एक रोशनी दिखने लगी। उसे लगा शायद गाँव होगा।

लेकिन पास पहुँचकर देखा – वह एक कब्रिस्तान था। क़ब्रों पर लालटेन जल रही थीं। जैसे वह और पास गई तो उसने देखा कि एक क़ब्र की मिट्टी अभी भी गीली पड़ी हुई थी और उस मिट्टी पर खुदा था – सोनिया। उसने अपने नाम को देखा और चीखते-चीखते बेहोश हो गई।जब सोनिया को होश आया तो उसने देखा कि उसके फ़ोन में अब 6:00 बज रहे थे, पर फिर भी अँधेरा हो रहा था। अब धुंध पूरे में फैल चुकी थी।
उसने उठकर चारों तरफ़ देखा तो जंगल में पूरी तरह सन्नाटा हो गया था। बस अब पायल की आवाज़ ही आ रही थी। जंगल पूरी तरह खामोश था। न हवा, न झींगुर, और न कोई आवाज़। बस उसकी पायल अपने आप बज रही थी – छनन… छनन…तभी अचानक उस धुंध में उभर आए कुछ शब्द: “सुबह कभी अब होएगी ही नहीं… ये रात हमेशा ऐसे ही रहेगी। और अब तू भी हमारे साथ ही रहेगी।” तभी सोनिया ने फिर से चीख मारी और सबके साथ-साथ सोनिया भी ग़ायब हो गई।
निष्कर्ष (Conclusion)
सोनिया की यह भयानक यात्रा बताती है कि वह जंगल से भागकर वापस नहीं आई, बल्कि एक प्रेत लोक में फँस गई। पायल की आवाज़ शुरू में उसे डराती थी, लेकिन अंत में पायल उसके ही पैरों में बंध गई—यह दर्शाता है कि वह अब उस दुनिया का हिस्सा बन चुकी है। गीली क़ब्र और कभी न ख़त्म होने वाली रात की घोषणा करती है कि सोनिया की भागने की सारी कोशिशें बेकार थीं, और वह हमेशा के लिए उन भटकती आत्माओं के साथ अँधेरे में कैद हो गई।
